Short story in Hindi :- 5 best motivation story in Hindi

Short story in Hindi, अगर आप student हे तो आपको ये लोककथा पढ़ने में बहुत interesting लगेगा। ये सबि लोककथा आपके जिन्दगी में बहुत सकारात्मक change लाएगा।

ये हरेक short story in Hindi (लोककथा ) से आप कुच न कुछ lesson सकेंगे।
में असा करता हु की ये Hindi short story आपको अच्छी लगी होगी।

short story in hindi



A short story in Hindi -1 ( लोककथा नं १) :

चआलाक स्वरणेश


एक बार एक चीक्‌ नाम का खरगोश था ।
एक दिन वह अपनी पत्नी के साथ बाग में
धूम रहा था जब उसकी पत्नी ने पेड़ पर
मीठे-मीठे फल लटके देखे तो उसके मुँह
में पानी आ गया । उसने चीकू से फल
तोड़कर लाने को कहा । इस पर चीक्‌ ने
कहा कि यह बाग एक भेड़िये का है जो बहुत ही खूँखार है । अगर उसे पता चल
गया कि हमने फल तोड़े है तो वह हम दोनों को मार कर खा जायेगा । परन्तु चीकू
की पत्नी उसके समझाने पर भी ना मानी । हारकर चींकू को फल तोड़ने जाना पड़ा।
चीक्‌ ने जैसे ही फल तोड़ने शुरू करे, वहाँ भेड़िया आ गया । चीकू फौरन फल लेकर
भगा और पास पड़े एक ड्रम में घूस गया और उस ड्रम में फल रखकर बाहर आकर
चुपचाप खड़ा हो गया । तभी भेड़िया वहाँ आ गया और उसने चीक्‌ से पूछा कि
क्या उसने किसी खरगोश को वहाँ से फल ले जाते हुए देखा है । चीकू फौरन समझ
गया कि भेड़िये ने उसे पहचाना नहीं ।
उसने भेड़िये से कहा कि - अभी-अभी एक खरगोश को मैने इस ड्रम में घूसते हुए देखा है । उसके पास बहुत से फल थे ।
भेड़िया ड्रम के पास गया तो उसे उसमें से फलों की खुशबू आ रही थी । भेड़िया
खरगोश को मारने के लिए उस ड्रम में घूस गया । चालाक चीकू के फटाफट ड्रम
का ढकन बंद कर दिया ।-भेड़िया ड्रम के अन्दर ही:मर गया-। चीकू:और उसकी
पत्नी उस बाग के मालिक बन गए | इस तरह चीक्‌ ने अपनी बुद्धि से न सिर्फ
अपनी जान बचायी बल्कि उस बाग का मालिक भी बन गया ।


A short story in Hindi -2 (लोककथा नं २) 

लालची कुत्ता

एक बार एक कुत्ते को बहुत जोर से भूख लगी थी । तभी उसे एक रोटी मिली ।
बह उस रोटी का पूरा आनंद लेना चहाता था । इसलिए वह उसे शान्ति में बैठकर
खाने की इच्छा मे. रोटी को अपने मुँह में दबाकर-लदी की ओर चल दिया । नदी पर
एक छोटा पुन था । जब-कल्ता नदी पार"कर रहा"था, तभी उसे पानी में अपनी
परछायी दिखाई दी । उसने अपनी परछायी को दूसरा कुत्ता समझा और उसकी रोटी
छीनना चाहा ।

रोटी छौनने के लिए-उसने भौंकते हुए नदी में छल्लाँग लगा दी । मुँह खोलते ही उसके
मुँह की रोटी नदी के जल में गिरकर बह गयी और-लालची-कूता भूखा ही रह गया ।
ड्सलिए कहा गया है कि हमें लालच नहीं करना चाहिये ।


A short story in Hindi -2 (लोककथा नं ३ )

अहंकार के बीज

ज्ञानी कहते हैं हमारा अहम यानी अहंकार सदैव दूसरों की कमजोरी एवं बुराई को ही
देखता है। अहं की अज्ञानता के कारण हम हमेशा दूसरों को नीचा दिखाने की
'कोशिश करते हैं। अहंकारी हमेशा दूसरों को नीचे गिराकर ही आगे बढ़ने के बारे में
सोचता रहता है। जब कभी वह ऊंचाई पर पहुंचता है, उसका दंभ और भी बढ़ जाता
है। पर ऐसे वक्‍त में वह भूल जाता है कि एक दिन जब उसका पतन होगा और वह
नीचे गिरेगा, तो उसका साथ देने वाला कोई नहीं होगा। वह अभागा अकेले ही अपने

कष्टों को भोगता हुआ पतन का शिकार हो जाता है। अहंकार हमारी पर्सनैलिटी को
उसी प्रकार धुंधला किए रहता है, जैसे धधकते अंगारों पर जमी हुई राख की पर्त
आंच की चमक को धुंधला किए रहती है। आखिर कोई व्यक्ति अहंकारी किस तरह
बन जाता है? अहंकार को तुच्छ प्रकार की मनुष्यता भी कहा जाता है। अनगिनत
पापों को जन्म देने वाला यह अहंकार आत्म प्रशंसा के बीज से उत्पन्न होता है। खुद
को सर्वोच्च मान लेने का भाव इसी से ही पैदा होता है। दूसरों पर हावी रहने की प्रवृत्ति
इसी से ही पैदा होती है। न जाने कितने प्रकार के मानसिक रोग अहंकार के कारण ही
पैदा होते हैं। हम जाने-अनजाने अनेक पाप अहंकार के कारण करते हैं। अहंकार न
जाने कितने रूपों में आकर हमें भ्रमित करता रहता है और हमें अपने लक्ष्य से
भटकाता है। अहंकार एक मृगतृष्णा के समान होता है।


A short story in Hindi-4 लोककथा नं ४) 

चालाक बन्दर

किसी नदी के किनारे एक बहुत बड़ा पेड़ था । उस पर एक बन्दर रहता था । उस
पेड़ पर बड़े मीठे फल लगते थे । बन्दर उन्हे भरपेट खाता और मौज उड़ाता । वह
अकेले ही मजे में दिन गुजार रहा था ।

एक दिन एक मगर उस नदी में से पेड़ के नीचे आया | बन्दर के पूछने पर मगर ने
बताया की वह वहाँ खाने की तलाश में आया है । इस पर बन्दर ने पेड़ से तोड़कर
बहुत से मीठे फल मगर को खाने के लिए दिए। इस तरह बन्दर और मगर में दोस्ती
हो गई । अब मगर हर रोज़ वहाँ आता और दोनों मिलकर खूब फल खाते । बन्दर
भी एक दोस्त पाकर बहुत खुश था ।

एक दिन बात-बात में मगर ने बन्दर को बताया की उसकी एक पत्नी है जो नदी
के उस पार उनके घर में रहती है । तब बन्दर ने उस दिन बहुत से मीठे फल
मगर को उसकी पली के लिए साथ ले जाने के लिए दिए ।

इस तरह मगर रोज़ जी भरकर फल खाता और अपनी पत्नी के लिए भी लेकर जाता।
मगर की पत्नी को फल खाना तो अच्छा लगता पर पति का देर से घर लौटना पसन्द
नहीं था । एक दिन मगर की पत्नी ने मगर से कहा कि अगर वह बन्दर रोज-रोज
इतने मीठे फल खाता है तो उसका कलेजा कितना मीठा होगा । मैं उसका कलेजा
खाऊँगी। मगर ने उसे बहुत समझाया पर वह नहीं मानी ।

मगरमच्छ दावत के बहाने बन्दर को अपनी पीठ पर बैठाकर अपने घर लाने लगा ।
नदी बीच में उसने बन्दर को अपनी पत्नी की कलेजे वाली बात बता दी | इस पर
बन्दर ने कहा कि वो तो अपना कलेजा पेड़ पर ही छोड़ आया है । वह उसे हिफाजत
से पेड़ पर रखता है। इसलिए: उन्हे वाघिस जाकर कलेजा लाना पड़ेगा । मगर बन्दर
को वापिस पैड़ के पास ले गया | बन्दर छलांग मारकर पैड़े पर चढ़ गया। उसने
हँसकर कहा कि- "जाओ मूर्खराजा, घर जाओ और अपनी“पत्नी से कहना कि तुम
दुनिया के सबसे बड़े मूर्ख हो । भला कोई भी अपना कलेजा निकालकर अलग
स्ख सकता है ।"

बन्दर की इस समझदारी से हमे पता चलता है कि मुसीबत के वक्‍त हमें कभी धैर्य
नहीं खोना चाहिए।


A short story in Hindi-5 लोककथा नं ५ )

पानी की कीमत

ए्क समय की बात है जब सिकंदर भारत
ग आया। तब उसकी मुलाकात एक
'फकीर से हुई। सिकंदर को देख फकीर हंसने
लगा। इस पर सिकंदर ने कहा कि यह मेरा
अपमान है। जानते नहीं में सिकंदर महान हूं।
इस पर फकीर और जोर से हंसने लगा। उसने
सिकंदर से कहा मुझे तो तुम में कोई महानता
नजर नहीं आती। में तो तुम में बड़ा दीन और
दरिद्र देखता हूं। सिकंदर बोला तुम पागल हो
गए हो। मैंने पूरी दुनिया को जीत लिया है।
तब उस उस फकीर ने कहा ऐसा कुछ नहीं
है तुम अभी भी साधारण ही हो फिर भी तुम
कहते हो तो में तुमसे एक बात पूछता हूं। मान
लो तुम किसी रेगिस्तान मे फंस गए और दूर-
दूर तक पानी का कोई स्त्रोत नहीं है और भी
हरियाली नहीं है जहां तुम पानी खोज सको
तो तुम एक गिलास पानी के बदले क्या दोगे?
मैं अपना आधा राज्य दे दूंगा तो इस पर फकीर
ने कहा अगर मैं आधे राज्य के लिए न मानूं
तो सिकंदर ने कहा इतनी बुरी हालत में तो
मैं अपना पूरा राज्य दे दूंगा। फकीर फिर हंसने
लगा और बोला कि तेरे राज्य का कुल मूल्य
है एक गिलास पानी और तुम ऐसे ही घमंड
से चूर हुए जा रहे हो। सिकंदर का गर्व मिट्टी
में मिल चुका था।

मोरल मंत्राः अहंकार हमेशा पतन का कारण
बनता है। विजेता और कामयाब वही है जो
सिद्ध होने के साथ विनग्र भी हो।


A short story in Hindi -6( लोककथा नं ६ )

लोककथा: लक्ष्मी और सरस्वती

एक बार मां लक्ष्मी और सरस्वती
में यह बहस होने लगी कि हम
दोनों में बड़ा कौन है। लक्ष्मी कहतीं
कि मैं बड़ी हूं, और सरस्वती मां
कहतीं कि मैं। देर तक बहस चलती
रही, लेकिन कोई निष्कर्ष नहीं
निकला। अभी बहस चल ही रही थी,
तभी वहां से एक भिखमंगा गुजरा।
लक्ष्मी ने कहा- 'मैं इस भिखमंगे को
अमीर बना दूंगी।' इस पर सरस्वती
ने हंसकर कहा- “मैं ऐसा नहीं होने
दूंगी।' थोड़ी देर बाद लक्ष्मी ने
भिखमंगे के रास्ते में सोने की ईंट
गिरा दी और हर्षित हो गई कि सोने
की ईंट पाकर भिखमंगा अमीर हो
जाएगा। भिखमंगा अभी सोने की ईंट

के दो-चार कदम इधर ही था, तभी
सरस्वती की उस पर कृपा हो गई।
भिखमंगे ने सोचा- 'मेरे पास तो दृष्टि
है। सब कुछ अच्छी तरह से दिखाई
दे रहा है। चलने में भी परेशानी नहीं
हो रही है, लेकिन अंधे लोग कैसे
चलते होंगे, थोड़ा मैं भी अंधा
बनकर देखूं।' भिखमंगा आंख बंद
करके चलने लगा और सोने की ईंट
को पार कर गया। लक्ष्मी ने अपनी
हार स्वीकार कर ली और सरस्वती
को अपने से बड़ा मान लिया।
सरस्वती ने कहा- “हमारी दृष्टि और
बुद्धि सही हो, तब ही हम धन के
अर्जन के साथ उसका सही उपयोग
कर सकते हैं।'



में असा करता हूँ  की आपको ये Short story in Hindi (लोककथा ) हिंदी भासामे  पढ़कर बहुत मजा आया होगा और इसे आपको बहुत प्रेणना  मिली  होगी। 


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